माँ

माँ ममता की है छाया,
हमें उसने चलना सिखलाया.  
ठेस खा कर गिरे  जब हम,  
अपनी गोद में हमें उठाया.  
अनेको कष्ट  सहकर भी ,
हमें खुशियों का एहसास कराया. 
हमारी सफलता के लिए ,
माँ ने सुन्दर मार्ग बनाया और
हमें हमारा लक्ष्य दिखाया 
अनेको बार गलतियां की हमने
और माँ को दुःख पहुँचाया ,   
फिर भी माँ का आशीष पाया . 
जिस पर है माँ का साया ,
उसने जीते जी स्वर्ग को पाया .
माँ का जिसने किया सम्मान ,
वह व्यक्ति बना देश की शान .
इश्वर से यह आशा है ,
जब तक है सांस में दम 
माँ  का साथ रहे तब तक कम से कम .
माँ है इस जग की निर्माता,
मुश्किल है करना इसका बखान 
इस देवी रूपी माँ को ,
मेरा सत सत प्रणाम . 
गंगेश कुमार .......
यह कविता मैंने 2004 में लिखी थी. 
मदर्स  डे पर दुनिया की सभी माँ को मेरा सत सत नमन...   

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