आज के नेता

चुनाव का मौसम आया ,
नेताओ का मन घबराया ।
शुरू हुई चुनाव प्रक्रिया ,
समर्थन लेकर पहुंचे नेता ।
पैसे देकर ख़रीदा सीट ,
पार्टी का दिल लिया जीत ।
फिर बनठन कर चले जनता के पास,
उनसे मिली इन्हे वोटों की आश ।
बढे आगे हर्षो उल्लास,
बीच में हुआ विरोधी का आभास,
नेताजी पहुचे फ़ौरन पास ।
आपस में हुई खीचा तानी ,
नेताजी ने शुरू की अपनी कहानी
एक मौका और दीजिए,
सब्र से काम लीजिये ।
हर घर में होगी बिजली- पानी ,
कभी न होगी बेईमानी ।
लोगों का दिल जीत कर ,
विरोधी को भारी वोटों से पीट कर,
नेताजी ने किया शपथ ग्रहण ।
कुर्सी पर बैठते ही डोला उनका मन ,
यह मौका है आखिरी ,
करलूं घोटालों का शुभारम्भ ।
एक बार फिर लोगों को ,
न मिला अन्न , न मिला पानी ,
मिली तो सिर्फ़ बेईमानी ।

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