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ये रिश्ता क्या कहलाता है...

नाम है हीना पर लोग कहते है  अक्षरा दिखने में है भोली-भाली और  सब के दिल को छूने वाली    इसे  देख कर शर्मा जाये अप्सरा . हर रिश्ते को निभाना इसका है काम ये रिश्ता क्या कहलाता है, जाना इसने और पाया  मुकाम. सब के दिल को भा गयी ये.. रिश्ता एक बना गयी ये .. छोटे परदे पर छा गयी ये .. इसे चाहने वालो को पूरा है ये विश्वास  एक्टिंग की दुनिया में होगी एक दिन खास.. .... गंगेश कुमार 

माँ

माँ ममता की है छाया, हमें उसने चलना सिखलाया.   ठेस खा कर गिरे  जब हम,   अपनी गोद में हमें उठाया.   अनेको कष्ट  सहकर भी , हमें खुशियों का एहसास कराया.  हमारी सफलता के लिए , माँ ने सुन्दर मार्ग बनाया और हमें हमारा लक्ष्य दिखाया  अनेको बार गलतियां की हमने और माँ को दुःख पहुँचाया ,    फिर भी माँ का आशीष पाया .  जिस पर है माँ का साया , उसने जीते जी स्वर्ग को पाया . माँ का जिसने किया सम्मान , वह व्यक्ति बना देश की शान . इश्वर से यह आशा है , जब तक है सांस में दम  माँ  का साथ रहे तब तक कम से कम . माँ है इस जग की निर्माता, मुश्किल है करना इसका बखान  इस देवी रूपी माँ को , मेरा सत सत प्रणाम .  गंगेश कुमार ....... यह कविता मैंने 2004 में लिखी थी.  मदर्स  डे पर दुनिया की सभी माँ को मेरा सत सत नमन...