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Showing posts from September, 2009

जिंदा है इंसानियत

कुछ समय पहले की बात है, जब मैं अपने एक मित्र के साथ साउथ एक्स फ्लाई ओवर के नीचे से डीफेंस कालोनी की ओर जा रहे रास्ते से गुजर रहा था। हम दोनों आपस में बात करते हुए जा रहे थे की अचानक हम ने देखा एक साईकिल सवार व्यक्ति जो की दुर्घटना ग्रस्त हो गया था और उसकी साईकिल भी पूर्ण रूप से टूट गई थी। पास में ही ट्रैफिक पुलिस के नौजवान भी खड़े थे , लेकिन उनके पास इस दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की सुध लेने का वक्त नही था। यह दुर्घटना इतनी तीव्र गति से घटी की हम यह नही जान सके की इस व्यक्ति को कौन ठोकर मार कर भागा है । तुंरत ही हम दोनों उसके पास गए और उस व्यक्ति को उठाया साथ ही साईकिल को सड़क के किनारे रख दिया । उस व्यक्ति को अधिक चोट तो नही लगी लेकिन उसकी साईकिल पूर्ण रूप से टूट गई थी । इतने में ही दूसरी छोर के रेड लाइट पर रुकी कार से एक नौजवान उतर कर आया और उसने अपनी जेब से पाँच सौ रुपए का नोट निकालते हुए उस व्यक्ति से पूछा , कही चोट तो नही लगी। ये पैसे रख लो अपनी साईकिल ठीक करवा लेना । यह कहकर अपनी गाड़ी में बैठ गया । इतने में रेड लाइट भी ग्रीन हो गई और वह व्यक्ति चला गया । आज भी जब कभी मैं उस रास्ते ...

झंझारपुर कमला ब्रिज

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ये इंडिया का एक ऐसा ब्रिज है जिस पर ट्रेन बस और यातायात का अन्य साधन एक साथ चलता हैं । ये बिहार के मधुबनी डिस्ट्रिक्ट के झंझारपुर स्थित कमला नदी पर बना है । रोज कई ट्रेन और हजारो वाहन इस पर होकर गुजरता है । वहां की जनता के लिए ये ब्रिज अहम् भूमिका निभाती है । आज कल इस ब्रिज की सुध लेने वाला कोई नही है । इस की स्तिथि काफी जर्जर हो गई है । जिसकी ख़बर न तो प्रशासन को है और न ही बिहार सरकार को ।

आख़िर विश्वविद्यालय प्रशासन की नींद खुल ही गई ..

दिल्ली विश्वविद्यालय में चुनावी घमासान पर काबू पाने और आचार संहिता के उल्लंघन को रोकने के लिए , विश्विद्यालय प्रशासन ने जो कदम उठाया है वो वाकई प्रशंसनिए है , लेकिन सवाल ये उठता है की ऐसे कदम प्रशासन ने उस समय क्यों उठाया जब छात्र संगठनो ने उम्मीदवारी तय कर दी थी , ये कदम उम्मीदवारी तय करने से पहले भी की जा सकती थी । इस से पहले भी कई बार आचार संहिता का उलंघन हुआ है लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई कदम नही उठाया गया । ऐसे में अब छात्र नेताओ और संगठनों में रोष होना भी स्वाभाविक है .....