जिंदा है इंसानियत

कुछ समय पहले की बात है, जब मैं अपने एक मित्र के साथ साउथ एक्स फ्लाई ओवर के नीचे से डीफेंस कालोनी की ओर जा रहे रास्ते से गुजर रहा था। हम दोनों आपस में बात करते हुए जा रहे थे की अचानक हम ने देखा एक साईकिल सवार व्यक्ति जो की दुर्घटना ग्रस्त हो गया था और उसकी साईकिल भी पूर्ण रूप से टूट गई थी। पास में ही ट्रैफिक पुलिस के नौजवान भी खड़े थे , लेकिन उनके पास इस दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की सुध लेने का वक्त नही था।
यह दुर्घटना इतनी तीव्र गति से घटी की हम यह नही जान सके की इस व्यक्ति को कौन ठोकर मार कर भागा है । तुंरत ही हम दोनों उसके पास गए और उस व्यक्ति को उठाया साथ ही साईकिल को सड़क के किनारे रख दिया । उस व्यक्ति को अधिक चोट तो नही लगी लेकिन उसकी साईकिल पूर्ण रूप से टूट गई थी । इतने में ही दूसरी छोर के रेड लाइट पर रुकी कार से एक नौजवान उतर कर आया और उसने अपनी जेब से पाँच सौ रुपए का नोट निकालते हुए उस व्यक्ति से पूछा , कही चोट तो नही लगी। ये पैसे रख लो अपनी साईकिल ठीक करवा लेना । यह कहकर अपनी गाड़ी में बैठ गया । इतने में रेड लाइट भी ग्रीन हो गई और वह व्यक्ति चला गया ।
आज भी जब कभी मैं उस रास्ते से गुजरता हूँ तो वह घटना याद आ जाती है और मन में खुशी होती है की इस भ्रष्टाचार के युग में आज भी इंसानियत जिंदा है ।

Comments

  1. prerna milti hai aise sansmaran padh kar ......
    swagat hai aapka chithha jagat mein ..

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  2. ब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है. आपको पढ़कर बहुत अच्छा लगा.

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  3. आपका स्वागत है
    आपको पढ़कर अच्छा लगा
    शुभकामनाएं



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