आख़िर विश्वविद्यालय प्रशासन की नींद खुल ही गई ..
दिल्ली विश्वविद्यालय में चुनावी घमासान पर काबू पाने और आचार संहिता के उल्लंघन को रोकने के लिए , विश्विद्यालय प्रशासन ने जो कदम उठाया है वो वाकई प्रशंसनिए है , लेकिन सवाल ये उठता है की ऐसे कदम प्रशासन ने उस समय क्यों उठाया जब छात्र संगठनो ने उम्मीदवारी तय कर दी थी , ये कदम उम्मीदवारी तय करने से पहले भी की जा सकती थी । इस से पहले भी कई बार आचार संहिता का उलंघन हुआ है लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई कदम नही उठाया गया । ऐसे में अब छात्र नेताओ और संगठनों में रोष होना भी स्वाभाविक है .....
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