चुनाव का मौसम आया , नेताओ का मन घबराया । शुरू हुई चुनाव प्रक्रिया , समर्थन लेकर पहुंचे नेता । पैसे देकर ख़रीदा सीट , पार्टी का दिल लिया जीत । फिर बनठन कर चले जनता के पास, उनसे मिली इन्हे वोटों की आश । बढे आगे हर्षो उल्लास, बीच में हुआ विरोधी का आभास, नेताजी पहुचे फ़ौरन पास । आपस में हुई खीचा तानी , नेताजी ने शुरू की अपनी कहानी । एक मौका और दी जिए, सब्र से काम लीजिये । हर घर में होगी बिजली- पानी , कभी न होगी बेईमानी । लोगों का दिल जीत कर , विरोधी को भारी वोटों से पीट कर, नेताजी ने किया शपथ ग्रहण । कुर्सी पर बैठते ही डोला उनका मन , यह मौका है आखिरी , करलूं घोटालों का शुभारम्भ । एक बार फिर लोगों को , न मिला अन्न , न मिला पानी , मिली तो सिर्फ़ बेईमानी ।
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