जिंदगी के सबसे अच्छे दिन ......

अगर कोई मुझ से पूछे जिन्दगी के सबसे अच्छे दिन के बारे में तो मैं बिना वक़्त लिए कह दूंगा वो स्कूल के दिन , वो कॉलेज के दिन । स्कूल के दिनों में तो कुछ पाबन्दी भी होती थी लेकिन फिर भी उन दिनों को भुलाया नहीं जा सकता । दोस्तों के साथ मस्ती करना ,उनसे लड़ना, टीचरों का डांट सुनना उसके बाद भी सरारत करना इन दिनों को याद करके फिर से स्कूल जाने का मन करता है । कॉलेज के दिनों की तो बात ही कुछ और थी यहाँ तो किसी चीज की पाबन्दी ही नहीं ....अपने मन की सुनो और जो मन में आये वो करो मेरी जिंदगी की सबसे यादगार दिनों में है कॉलेज का दिन २०-२५ लडको का ग्रुप होता था और खूब मस्ती करते थे हम लोग। चुनाव के दिनों में नेतागिरी होती थी। फेस्ट में खूब नाचते थे डीजे पर । और पेपर के दिनों में पढने की याद आती थी । फुल मस्ती करते थे । नए सत्र के शुरुआत के समय तो नए छात्रों के साथ खूब मजे करते थे ।
अब प्रश्न ये उठता है की इन दिनों की याद क्यों आई ..बिना दुख आये सुख वाले दिन याद नहीं किये जाते। अब मैं रोज़गार में लगा हूँ तो पता चला है की नौकरी क्या चीज होती है कितना भी अच्छा कर लो जब तक बॉस खुश नहीं काम करने का कोई फ़ायदा नहीं...इसलिए याद आ रहा है वो दिन जब हम हुआ करते थे अपने मन के मालिक............................

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